नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभाव (उच्च शिक्षा के विशेष संदर्भ में)
डॉ0 नागेश्वर अग्रवाल1, मोनिका सतनामी2
1प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष (वाणिज्य), शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जिला- सतना (म0प्र0)
2शोधार्थी (वाणिज्य), शासकीय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सतना (म0प्र0)
*Corresponding Author E-mail: dhanbsp@gmail.com
ABSTRACT:
नई शिक्षा नीति 2020 भारत की शिक्षा नीति है जिसे भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। सन 1986 में जारी हुई नई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है। यह नीति अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारत-केन्द्रित शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना की गई है, जो इसकी परंपरा, संस्कृति, मूल्यों और लोकाचार में परिवर्तन लाने में अपना बहुमूल्य योगदान देने को तत्पर है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य बिना किसी भेद भाव के प्रत्येक व्यक्ति को बढ़ने और विकसित होने के लिए एक सामान अवसर प्रदान करना है तथा विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, बुद्धि और आत्मविश्वास का सर्जन कर उनके दृष्टिकोणों का विकास करना है। इस शोधपत्र में शोधकर्ता द्वितीयक आंकड़ों के माध्यम से जो गुणात्मक स्तरों पर आधारित है नई शिक्षा नीति की वास्तविक मूक विशेषताओं को दर्शाना चाहता है। उपर्युक्त विश्लेषित तथ्यों के आधार पर शोधकर्ता, इस शोधपत्र के माध्यम से अनेक सुझावों को प्रस्तुत करता है, जो भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए आती आवश्यक है। नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय परिवेश के अनुरूप नई शिक्षा नीति बनाई थी, उस पर अमल चल रहा है। इसमें सांस्कृतिक चेतना के साथ आधुनिक विकास को महत्व दिया गया। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत की यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में बड़ा योगदान देगी। बहुविषयक शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालय देश के युवाओं के लिए नए अवसर का सृजन करेगी। यह अंतर अनुशासनात्मक अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ भारत को अनुसंधान एवं विकास का वैश्विक हब बनाने में सहायक होगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए एक नई कल्पना का सूत्रपात किया है। यह एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण से जुड़ी दृष्टि को रेखांकित करने वाली है।
KEYWORDS: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, डिजिटल युग, शिक्षार्थियों, ज्ञान, शिक्षा।
प्रस्तावना: -
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी 2020), जिसे 29 जुलाई 2020 को भारत के केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था, भारत की नई शिक्षा प्रणाली के दृष्टिकोण को रेखांकित करती है। नई शिक्षा नीति 2020 ने पिछली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986, की जगह ले ली है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य 2021 तक भारत की शिक्षा प्रणाली को बदलना है और यह नीति 2020 भारत को बदलने में सीधे प्रकार से योगदान प्रदान करती है और भारतीय लोकाचार में निहित शिक्षा प्रणाली को देखती है। इसका उद्देश्य धर्म, लिंग, जाति या पंथ के किसी भी भेदभाव के बिना, सभी को बढ़ने और विकसित होने के लिए एक समान मंच प्रदान करना और सभी को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करके मौजूदा जीवंत ज्ञान समाज को बनाए रखना और उसकी देखभाल करना है। यह भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में भी एक कदम है। इस नीति में यह परिकल्पना की गई है कि हमारे संस्थानों के समान पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र को,छात्रों में मौलिक कर्तव्यों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करनी चाहिए और संवैधानिक मूल्यों, अपने देश और एक बदलती दुनिया के साथ एक संबंध पैदा करना चाहिए। इस नीति का दृष्टिकोण शिक्षार्थियों के बीच ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास, बुद्धि और कर्म के साथ न केवल विचार बल्कि मूल्यों और दृष्टिकोणों में भी विकास करना है, जो मानव अधिकारों, सतत विकास और जीवन का समर्थन करते हैं और वैश्विक कल्याण के लिए एक जिम्मेदार प्रतिबद्धता, जिससे वास्तव में एक वैश्विक नागरिक प्रतिबिंबित होता है।
भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिये अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाए। 1948 में डॉ॰ राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन हुआ था। तभी से राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण होना भी शुरू हुआ था। कोठारी आयोग (1964-1966) की सिफारिशों पर आधारित 1968 में पहली बार महत्त्वपूर्ण बदलाव वाला प्रस्ताव इन्दिरा गांधी के प्रधानमन्त्री काल में पारित हुआ था।
अगस्त 1985 शिक्षा की चुनौती’’ नामक एक दस्तावेज तैयार किया गया जिसमें भारत के विभिन्न वर्गों (बौद्धिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यावसायिक, प्रशासकीय आदि) ने अपनी शिक्षा सम्बन्धी टिप्पणियाँ दीं और 1986 में भारत सरकार ने नई शिक्षा नीति 1986’’ का प्रारूप तैयार किया। इस नीति की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसमें सारे देश के लिए एक समान शैक्षिक ढाँचे को स्वीकार किया और अधिकांश राज्यों ने 10$2$3 की संरचना को अपनाया। इसे राजीव गांधी के प्रधानमन्त्रीत्व में जारी किया गया था।
इस नीति में 1992 में संशोधन किया गया था। 2014 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में एक नवीन शिक्षा नीति बनाने का विषय शामिल था। 2019 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति के लिये जनता से सलाह मांगना शुरू किया था।
आधुनिक युग में तकनीक व भौतिक सुविधाओं का खूब विकास हुआ। लेकिन विकास की दौड़ में सामाजिक व मानवीय संवेदनाओं का महत्व कम हुआ है। उपभोगवादी सभ्यता ने अनेक प्रकार की अन्य समस्याओं को भी जन्म दिया है। प्रकृति व पर्यावरण संबंधी संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में संतुलित विकास पर ध्यान देना अपरिहार्य हो गया है। यह कार्य पाश्चात्य सभ्यता के माध्यम से नहीं हो सकता। उन्हें तो अपनी समस्याओं का समाधान दिखाई नहीं दे रहा है क्योंकि उनका चिंतन इसके अनुरूप नहीं है। जबकि भारत के प्राचीन ऋषियों मनीषियों का चिंतन शाश्वत है। यह आज भी प्रासंगिक है।
मात्र एक वर्ष में देश के बारह सौ से ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों ने स्किल इंडिया से जुड़े कोर्सों की शुरुआत की है। अनेक भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई संभव होगी। इंजीनियरिंग के कोर्स का इन भाषाओं में अनुवाद शुरू हो चुका है। मातृभाषा में पढ़ाई से गरीबों का बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। प्रारंभिक शिक्षा में भी मातृभाषा को प्रमोट करने का काम शुरू हो गया है। शिक्षा में भाषा सभ्यता संस्कृति सामाजिक मूल्यों को समुचित स्थान मिल रहा है। ऐसी शिक्षा नीति ही राष्ट्रीय स्वाभिमान का जागरण करती है। अंग्रेजों द्वारा भारत में शुरू की गई शिक्षा राष्ट्रीय स्वाभिमान को हीनता में बदलने वाली थी। शिक्षा केवल बाबू बनाने के लिए होगी,तो उससे व्यक्ति समाज और राष्ट्र का अपेक्षित लाभ नहीं हो सकता। मानवीय दृष्टिकोण का भाव भी होना चाहिए।
गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का उद्देश्य, ऐसे व्यक्तियों का विकास करना होना चाहिए जो उत्कृष्ट, विचारशील और अच्छी रचनात्मक प्रवत्ति के हों। यह एक व्यक्ति को रुचि के एक या एक से अधिक विशिष्ट जैसे विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला, मानविकी, भाषा, व्यक्तिगत, तकनीकी, व्यावसायिक विषयों सहित क्षेत्रों में गहराई से अध्ययन करने और चरित्र, नैतिक और संवैधानिक मूल्यों, बौद्धिक जिज्ञासा, वैज्ञानिक स्वभाव, रचनात्मकता, सेवा भावना और 21 वीं सदी के कौशल को आवश्यक सीमा तक विकसित करने में सक्षम बनाती है। नई शिक्षा नीति वर्तमान प्रणाली में कुछ मौलिक परिवर्तन लाती है, और इसमें मुख्य आकर्षण बहु-विषयक विश्वविद्यालय और कॉलेज हैं, जिसमे प्रत्येक जिले में या उसके पास कम से कम एक छात्र पाठ्यक्रम, शिक्षाशास्त्र, बेहतर छात्र अनुभव के लिए मूल्यांकन और समर्थन, एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान शामिल है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में उत्कृष्ट सहकर्मी-समीक्षा कार्य और प्रभावी ढंग से बीज अध्ययन का समर्थन करेगी ।
नई शिक्षा नीति 2020 पांच स्तंभों पर केन्द्रित हैः वहनीयता, अभिगम्यता, गुणवत्ता, न्यायपरस्ता और जवाबदेही - निरंतर सीखने की प्रकिर्या को सुनिश्चित करने के लिए। इसे समाज और अर्थव्यवस्था में ज्ञान की मांग के रूप में नागरिकों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे नियमित आधार पर नए कौशल हासिल करने की आवश्यकता को पूरा किया जा सकता है। इस प्रकार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसर पैदा करना, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 2030 में सूचीबद्ध पूर्ण और उत्पादक रोजगार और अच्छे काम की ओर अग्रसर होना, नई शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य है। नई शिक्षा नीति 2020 ने पिछली राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 की जगह ली है और 2040 तक भारत में प्राथमिक और उच्च शिक्षा दोनों को बदलने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार किया है। नई शिक्षा नीति 2020 स्कूल और उच्च शिक्षा दोनों में महत्वपूर्ण सुधारों की मांग करती है जो अगली पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए तैयार करती हैं जिससे वो नए डिजिटल युग में प्रतिस्पर्धा कर सके। इस प्रकार, नई शिक्षा नीति बहु-विषयकता, डिजिटल साक्षरता, लिखित संचार, समस्या-समाधान, तार्किक तर्क और व्यावसायिक प्रदर्शन पर अत्यधिक प्रभाव डालती है।
अध्ययन का उद्देश्य
इस शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालना है तथा नई शिक्षा नीति 2020 से संबंधित प्राथमिक और माध्यमिक डेटा का विश्लेषण करना है। इसके अन्य मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं।
ऽ नई शिक्षा नीति 2020 का मूल लक्ष्य और उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक शिक्षा को सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाना
ऽ नई शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का अध्ययन करना।
ऽ उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि को दर्शाना।
ऽ उचित बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करके ड्रॉप-आउट को कम करना।
ऽ शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण प्रदान करने के साथ ही, छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना।
ऽ छात्रों की निगरानी करना और उन्हें उचित शैक्षिक वातावरण प्रदान करना।
अनुसंधान क्रियाविधि
यह अध्ययन पाठ्य, आलोचनात्मक, मूल्यांकनात्मक, वर्णनात्मक, विश्लेषणात्मक और व्याख्यात्मक विधियों का उपयोग करते हुए प्राथमिक और माध्यमिक स्रोतों के माध्यम से उच्च शिक्षा के विशेष संदर्भ के साथ एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण के रूप में नई शिक्षा नीति 2020 के संपूर्ण अध्ययन पर भी ध्यान केन्द्रित करता है। इसमें एमएलए हैंडबुक ऑफ रिसर्च के 8 वें संस्करण का सख्ती से पालन किया गया है।
1. डेटा संग्रह
शोध अध्ययन के लिए प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से आँकड़ों का संकलन किया गया है जिसके आधार पर सम्पूर्ण प्रपत्र का विश्लेषण किया गया है।
प्राथमिक स्रोत
प्राथमिक संसाधन नई शिक्षा नीति 2020 के मूल पाठ से एकत्र किए गए हैं जो भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है।
माध्यमिक स्रोत
एक माध्यमिक संसाधन एक स्रोत है जो नई शिक्षा नीति 2020 पर संदर्भ पुस्तकों सहित पुरानी या गैर-मूल जानकारी प्रदान करता है। माध्यमिक स्रोतों में जीवनी, लेखक के कार्यों के महत्वपूर्ण अध्ययन, शोध पत्र और शोध प्रबंध, शोध पुस्तकें, व्यक्तिगत साक्षात्कार, विकिपीडिया, ब्रिटानिका और अन्य वेबसाइटें शामिल हैं।
अध्ययन का महत्व
वास्तविक तथ्यों पर आधारित इस अध्ययन के निष्कर्ष समाज के हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अध्ययन क्षेत्र में पूर्व अनुसंधान की कमी के कारण यह शोध मॉडल इस अध्ययन के लिए प्रस्तावित है। शोधकर्ता इस वर्तमान अध्ययन के सभी पहलुओं को समझाने का प्रयास करेगा। वर्तमान शोध नई शिक्षा नीति 2020 के नियम एवं शर्तों के अनुसार उच्च शिक्षा के सुधारों को समझने में मदद करेगा। यह शोध नई शिक्षा नीति 2020 के बारे में पाठकों के बीच जागरूकता पैदा करने का प्रयास करेगा। यह संदर्भ सामग्री भी तैयार करेगा और आगे के अध्ययन के लिए गुंजाइश प्रदान करेगा।
साहित्य की समीक्षा
संक्षेप में, इसमें पिछले अध्ययनों की समीक्षा प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है, जो इस अध्ययन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रासंगिक है। इसमें नई शिक्षा नीति 2020 और विशेष रूप से उच्च शिक्षा से संबंधित अध्ययनों पर किए गए कार्यों की एक झलक देखने को मिलती है।
पीएस ऐथल और शुभ्रज्योत्सना ऐथल के अनुसार उनके शोध पत्र भारतीय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का विश्लेषण इसके उद्देश्यों को प्राप्त करने की दिशा में। भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 गुणवत्ता, आकर्षण, सामर्थ्य में सुधार के लिए नवीन नीतियां बनाकर और निजी क्षेत्र के लिए उच्च शिक्षा को खोलकर आपूर्ति बढ़ाने के लिए और साथ ही बनाए रखने के लिए सख्त नियंत्रण के साथ इस तरह के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हर उच्च शिक्षा संस्थान में गुणवत्ता फ्री-शिप्स और स्कॉलरशिप के साथ योग्यता-आधारित प्रवेश को प्रोत्साहित करके, संकाय सदस्यों के रूप में योग्यता और अनुसंधान आधारित निरंतर प्रदर्शन, और निकायों को विनियमित करने में योग्यता आधारित सिद्ध नेताओं, और प्रौद्योगिकी-आधारित के माध्यम से प्रगति की स्व-घोषणा के आधार पर द्विवार्षिक मान्यता के माध्यम से गुणवत्ता की सख्त निगरानी, एनईपी-2020 के 2030 तक अपने उद्देश्यों को पूरा करने की उम्मीद है। संबद्ध कॉलेजों के वर्तमान नामकरण के साथ सभी उच्च शिक्षा संस्थान बहु-अनुशासनात्मक स्वायत्त कॉलेजों के रूप में उनके नाम पर डिग्री देने की शक्ति के साथ विस्तार करेंगे या उनके संबद्ध विश्वविद्यालयों के घटक कॉलेज बन जाएंगे। एक निष्पक्ष एजेंसी नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बुनियादी विज्ञान, अनुप्रयुक्त विज्ञान और सामाजिक विज्ञान और मानविकी के प्राथमिकता वाले अनुसंधान क्षेत्रों में नवीन परियोजनाओं के लिए धन मुहैया कराएगी।
अजय कुरियन और सुदीप बी चेंमना के शब्दों में, “नई शिक्षा नीति 2020 की घोषणा पूरी तरह से कई लोगों द्वारा अप्रत्याशित थी। नई शिक्षा नीति 2020 ने जिन बदलावों की सिफारिश की है, वे कुछ ऐसे थे जिन्हें कई शिक्षाविदों ने कभी आते नहीं देखा। यद्यपि शिक्षा नीति ने स्कूल और कॉलेज की शिक्षा को समान रूप से प्रभावित किया है, यह लेख मुख्य रूप से नई शिक्षा नीति 2020 और उच्च शिक्षा पर इसके प्रभाव पर केन्द्रित है। यह पत्र नई शिक्षा नीति की मुख्य विशेषताओं को भी रेखांकित करता है और विश्लेषण करता है कि वे मौजूदा शिक्षा प्रणाली को कैसे प्रभावित करते हैं। नई शिक्षा नीति में रीयल-टाइम मूल्यांकन प्रणाली और परामर्शी निगरानी और समीक्षा ढांचे के लिए आश्वस्त रूप से प्रावधान किया गया है। यह शिक्षा प्रणाली को पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए हर दशक में एक नई शिक्षा नीति की अपेक्षा करने के बजाय, अपने आप में लगातार सुधार करने के लिए सशक्त बनाएगा। यह अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि होगी। नई शिक्षा नीति 2020 उच्च शिक्षा के लिए एक निर्णायक क्षण है। प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन ही इसे वास्तव में पथप्रदर्शक बना देगा।‘‘
संबंधित नीतियाँ
कई समवर्ती नीतियां और दस्तावेज़ हैं जो एनईपी 2020 में मदद करेंगे। तालिका 1 इन नीतियों और दस्तावेजों को निर्दिष्ट करने का प्रयास करती है।
तालिका 1ः एनईपी 2020 के लिए प्रासंगिक नीतियां और समवर्ती दस्तावेज+
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यह समझना आवश्यक था कि किस सरकार या राजनीतिक दल ने भारतीय शिक्षा प्रणाली को विकसित करने के लिए बेहतर शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। यह पेपर विभिन्न समय-सीमाओं, भारत के प्रधानमंत्रियों और प्रमुख शैक्षिक सुधारों (तालिका 2) के आधार पर जानकारी एकत्र करने का प्रयास करता है।
कार्यप्रणाली:-
कंप्यूटर-सहायता प्राप्त गुणात्मक डेटा विश्लेषण
तालिका 2: समयरेखा, प्रधान मंत्री और नीति स्तर पर महत्वपूर्ण शैक्षिक सुधार
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उच्च शिक्षा में सुधार
यह नीति ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में प्राथमिक शिक्षा से उच्च शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण में परिवर्तनकाल के लिए एक व्यापक ढांचा है। इस नीति का उद्देश्य 2021 तक भारत की शिक्षा प्रणाली को बदलना है। नई शिक्षा नीति को स्कूल स्तर से विश्वविद्यालय स्तर तक प्रणाली में औपचारिक परिवर्तनों को औपचारिक रूप देने के उद्देश्य से पेश किया गया है। बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, अब से शैक्षिक सामग्री प्रमुख अवधारणाओं, विचारों, अनुप्रयोगों और समस्या समाधान के कोणों पर ध्यान केन्द्रित करेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति से देश की उच्च शिक्षा प्रणाली पर सकारात्मक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। यह तथ्य कि विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की अनुमति है, सरकार की एक सराहनीय पहल है। इससे छात्रों को अपने देश में शिक्षा की समग्र गुणवत्ता का अनुभव करने में मदद मिलेगी। बहु-विषयक संस्थान शुरू करने की नीति कला, मानविकी जैसे सभी क्षेत्रों में नए सिरे से ध्यान केन्द्रित करेगी और शिक्षा के इस रूप से छात्रों को सीखने और समग्र रूप से विकसित होने में मदद मिलेगी।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में उच्च शिक्षा
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 2030 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को मौजूदा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने के लिए एनईपी 2020 की कल्पना की गई थी। इसका उद्देश्य मुक्त और दूरस्थ शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षा और शिक्षा में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करके छात्रों के समग्र व्यक्तित्व का निर्माण करना है। इसके अलावा, देश में अनुसंधान कार्य को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना की जाएगी। देश भर में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एकल नियामक के रूप में परिकल्पित एक राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी) की स्थापना की जाएगी। भारतीय उच्च शिक्षा परिषद (एचईसीआई) में विभिन्न भूमिकाओं को पूरा करने के लिए कई कार्यक्षेत्र होंगे। सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए एक राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी और समान स्तर की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के लिए एक सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी) स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा, विषयों में पाठ्यक्रम और कार्यक्रम, जैसे कि इंडोलॉजी, भारतीय भाषाएं, चिकित्सा की आयुष प्रणाली, योग, कला, संगीत, इतिहास, संस्कृति और आधुनिक भारत, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और उससे आगे के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक पाठ्यक्रम, सार्थक अवसर वैश्विक गुणवत्ता मानकों के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सामाजिक जुड़ाव, गुणवत्ता आवासीय सुविधाओं और परिसर में समर्थन आदि को बढ़ावा दिया जाएगा।
उच्च शिक्षा में प्रत्यायन
उच्च शिक्षा के नियामक तंत्र में अन्य प्रमुख कार्यों के बीच एक स्वतंत्र निकाय द्वारा संचालित मान्यता होगी। संस्थानों के पास ओपन डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) और ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने का विकल्प होगा, बशर्ते वे ऐसा करने के लिए मान्यता प्राप्त हों, अपनी पेशकशों को बढ़ाने, पहुंच में सुधार करने, जीईआर बढ़ाने और आजीवन सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए।
लर्निंग सर्विस प्रोवाइडर की विश्वसनीयता में सुधार के लिए प्रत्यायन योजना को राष्ट्रीय शिक्षा और प्रशिक्षण बोर्ड, भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा औद्योगिक संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार) के तहत विकसित किया गया है। प्रत्यायन गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित करता है जैसे प्रशिक्षकध्संकाय, आधारभूत संरचनाय कार्यक्रम डिजाइन (विकास और वितरण) प्रशिक्षण प्रबंधन प्रणाली (3 आयामः हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, ह्यूमनवेयर/स्किनवेयर) आदि।
साइबर सुरक्षा में शिक्षा और कौशल
विश्व आर्थिक मंच 2021 की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2021 के अनुसार, ‘साइबर सुरक्षा विफलता‘ दुनिया के लिए चौथा सबसे महत्वपूर्ण खतरा है। जैसा कि चल रही महामारी के कारण शिक्षा और अध्यन पहले ही साइबर स्पेस में चली गई है, प्रत्येक व्यक्ति की गोपनीयता और सुरक्षा की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। इस प्रकार, चूंकि डिजिटलीकरण को अपनाना केन्द्र स्तर पर है, इसलिए हमारे नेटवर्क और साइबरस्पेस को सुरक्षित बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस वर्तमान परिदृश्य में, यह प्रासंगिक हो जाता है कि ‘साइबर सुरक्षा लचीलापन‘ के लिए क्षमता निर्माण को प्रमुख महत्व दिया जाता है और सीखने की धारा के बावजूद उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता है।
उच्च शिक्षा में अनुसंधान और नवाचार
नई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख क्षेत्रों में से एक सरकारी और निजी क्षेत्रों से उच्च अनुसंधान एवं विकास निवेश को प्रोत्साहित करना है। इससे इनोवेशन और इनोवेटिव माइंडसेट को बढ़ावा मिलेगा। इसे सुगम बनाने के लिए उद्योग आधारित कौशल/अपस्किलिंग/रीस्किलिंग के लिए एक मजबूत उद्योग प्रतिबद्धता और शिक्षा जगत के साथ घनिष्ठ हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इसके अलावा, ‘‘बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर)‘‘ के बारे में ज्ञान बढ़ाने और इससे लाभ प्रदान करने के लिए इसके संरक्षण के लिए कौशल को विकसित करना प्रासंगिक हो जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षा प्रौद्योगिकी मंच (एनईटीएफ)
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्थापित किए जाने के लिए परिकल्पित एनईटीएफ सही दिशा में एक कदम है। शिक्षण-शिक्षण वितरण के सभी आयामों में गुणवत्ता वाले एड-टेक उपकरण शैक्षणिक संस्थानों को जल्दी से अनुकूलित करने में मदद करेंगे। साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करने, फायरवॉल को अपनाने और घुसपैठ का पता लगाने वाले सिस्टम (आईडीएस) के अलावा ‘गोपनीयता और सुरक्षा‘ सुनिश्चित करने के लिए अंतर्निहित साइबर सुरक्षा लचीलेपन के साथ ओपन-सोर्स डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म पर स्वदेशी एड-टेक टूल को होस्ट करने की आवश्यकता है। यह प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा करेगा।
उपसंहार
अंत में सम्पूर्ण प्रपत्र के अध्यन करने के पश्चात यह कहा जा सकता है की नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार शिक्षा रटने वाले विषयों, समय सीमा को पूरा करने और अंक प्राप्त करने से कहीं अधिक है, लेकिन शिक्षा का वास्तविक अर्थ ज्ञान, कौशल, मूल्यों को प्राप्त करना और उस क्षेत्र में निरंतर कार्य करना और प्रगति करना है,जिसमें व्यक्ति अपनी रुचि खोज की करता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि अगर नई शिक्षा नीति 2020 को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह भारतीय शिक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। हालाँकि इसके कुछ उद्देश्यों में लक्ष्यों की स्पष्टता का अभाव है, लेकिन हम वास्तव में इसका न्याय तब तक नहीं कर सकते जब तक कि इसकी लिखित योजनाएँ क्रिया में न आ जाएँ। हम केवल सर्वोत्तम परिणामों की आशा कर सकते हैं, आखिरकार, यह छात्रों के समग्र विकास और प्रगति को ध्यान में रखते हुए लाई गयी है।
9. सारस्वत, मालती एवं बाजपेयी.बी.एल (1996): भारतीय शिक्षा का विकास एवं समस्यायें, आलोक प्रकाशन, लखनऊhttps://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/NEP_Final_English_0.pdf
10. https://en.wikipedia.org/wiki/National_Education_Policy_2020
11. Puri, Natsaha (30 August 2019). A Review of the National Education Policy of the Government of India - The Need for Data and Dynamism in the 21st Century. SSRN.
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Received on 22.09.2023 Modified on 28.10.2023 Accepted on 24.11.2023 © A&V Publication all right reserved Int. J. Ad. Social Sciences. 2023; 11(4):246-253. DOI: 10.52711/2454-2679.2023.00040 |